INDIAN ECONOMY (भारतीय अर्थव्यवस्था)
भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्वरूप
1. भारतीय अर्थव्यवस्था कैसी है ?
(a) पूँजीवादी अर्थव्यवस्था
(b) साम्यवादी अर्थव्यवस्था
(c) स्वतंत्र अर्थव्यवस्था
(d) मिश्रित अर्थव्यवस्था
Ans. (d) मिश्रित अर्थव्यवस्था
[SSC 2015]
Explain: भारतीय अर्थव्यवस्था एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है जहाँ सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों साथ-साथ कार्य करते हैं। इसमें सरकार बुनियादी और रणनीतिक उद्योगों का नियंत्रण करती है, जबकि निजी क्षेत्र को लाभ और प्रतिस्पर्धा के लिए स्वतंत्रता दी जाती है। यह आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण का संतुलन है।
2. ‘मिश्रित अर्थव्यवस्था’ का क्या अभिप्राय है ?
(a) अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग दोनों को बढ़ावा देना
(b) सरकारी एवं निजी क्षेत्र का सहअस्तित्व
(c) अमीर एवं गरीब का सहअस्तित्व
(d) छोटे और बड़े उद्योगों का सहअस्तित्व
Ans. (b) सरकारी एवं निजी क्षेत्र का सहअस्तित्व
[SSC 2013, 2015]
Explain: मिश्रित अर्थव्यवस्था का मुख्य लक्षण सरकारी (Public) और निजी (Private) क्षेत्रों का एक साथ मौजूद होना है। इसमें व्यक्तिगत लाभ के साथ-साथ जनकल्याण को भी प्राथमिकता दी जाती है। भारत ने स्वतंत्रता के बाद अपनी नियोजित अर्थव्यवस्था के लिए इसी मॉडल को अपनाया था।
3. आर्थिक विकास के दृष्टिकोण से भारत की गिनती होती है –
(a) पिछड़े राष्ट्र के रूप में
(b) विकसित राष्ट्र के रूप में
(c) विकासशील राष्ट्र के रूप में
(d) अर्द्धविकसित राष्ट्र के रूप में
Ans. (c) विकासशील राष्ट्र के रूप में
Explain: भारत को एक विकासशील राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यहाँ प्रति व्यक्ति आय और औद्योगिक आधार निरंतर बढ़ रहा है। यद्यपि भारत एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति है, फिर भी गरीबी और बुनियादी ढांचे जैसी चुनौतियाँ इसे विकसित देशों की श्रेणी से अलग करती हैं।
4. भारतीय अर्थव्यवस्था का कौन-सा क्षेत्र सकल राष्ट्रीय उत्पाद में सबसे अधिक योगदान करता है ?
(a) प्राथमिक क्षेत्र
(b) द्वितीयक क्षेत्र
(c) तृतीयक क्षेत्र
(d) सार्वजनिक क्षेत्र
Ans. (c) तृतीयक क्षेत्र
Explain: भारत के सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) में सेवा क्षेत्र (तृतीयक क्षेत्र) का योगदान 50% से अधिक है। इसमें बैंकिंग, बीमा, पर्यटन और आईटी जैसी सेवाएँ शामिल हैं। यह क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास की मुख्य गति शक्ति (Engine of growth) बन चुका है।
5. ‘बन्द अर्थव्यवस्था’ (Closed economy) वह अर्थव्यवस्था है, जिसमें –
(a) मुद्रापूर्ति पूर्णतः नियंत्रित होती है
(b) घाटे की वित्त व्यवस्था होती है
(c) केवल निर्यात होता है
(d) न तो निर्यात, न ही आयात होता है
Ans. (d) न तो निर्यात, न ही आयात होता है
[UPSC 2011]
Explain: बंद अर्थव्यवस्था वह होती है जिसका बाहरी देशों के साथ कोई व्यापारिक संबंध नहीं होता। इसमें न तो वस्तुओं का आयात किया जाता है और न ही निर्यात। ऐसी अर्थव्यवस्था पूरी तरह आत्मनिर्भर रहने का प्रयास करती है, जो वर्तमान वैश्विक युग में बहुत दुर्लभ है।
6. ऐसी अर्थव्यवस्था को क्या कहते हैं, जिसका शेष विश्व से कोई सम्बन्ध नहीं होता ?
(a) समाजवादी अर्थव्यवस्था
(b) संवृत्त/बंद अर्थव्यवस्था
(c) मुक्त अर्थव्यवस्था
(d) मिश्रित अर्थव्यवस्था
Ans. (b) संवृत्त/बंद अर्थव्यवस्था
[SSC 2014]
Explain: वह अर्थव्यवस्था जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन के लिए प्रतिबंधित होती है, उसे संवृत्त या बंद अर्थव्यवस्था (Closed Economy) कहते हैं। यह आत्मनिर्भरता पर केंद्रित होती है। इसके विपरीत, ‘खुली अर्थव्यवस्था’ वह है जो बाहरी विश्व के साथ व्यापारिक गतिविधियों में संलग्न रहती है।
7. यह सत्य होगा कि भारत को परिभाषित किया जाए –
(a) एक खाद्य की कमी वाली अर्थव्यवस्था के रूप में
(b) एक श्रम आधिक्य वाली अर्थव्यवस्था के रूप में
(c) एक व्यापार आधिक्य वाली अर्थव्यवस्था के रूप में
(d) एक पूँजी आधिक्य वाली अर्थव्यवस्था के रूप में
Ans. (b) एक श्रम आधिक्य वाली अर्थव्यवस्था के रूप में
[BPSC 2008]
Explain: भारत की विशाल जनसंख्या और युवाओं की संख्या के कारण इसे श्रम आधिक्य (Labour Surplus) वाली अर्थव्यवस्था कहा जाता है। यहाँ पूंजी की तुलना में मानवीय संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इसी कारण भारत में श्रम-प्रधान उद्योगों और कौशल विकास पर विशेष बल दिया जाता है।
8. किसी देश का आर्थिक विकास निर्भर किस पर करता है ?
(a) प्राकृतिक संसाधन
(b) पूँजी निर्माण
(c) बाजार का आकार
(d) उपर्युक्त सभी
Ans. (d) उपर्युक्त सभी
[SSC 2011]
Explain: आर्थिक विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता, निवेश के लिए पूंजी निर्माण और मांग उत्पन्न करने के लिए बाजार का बड़ा होना अनिवार्य है। ये सभी कारक मिलकर किसी राष्ट्र की उत्पादन क्षमता और जीवन स्तर में सुधार लाने में सहायक होते हैं।
9. ‘वैश्वीकरण’ (Globalization) का अर्थ है –
(a) अर्थव्यवस्था का एकीकरण
(b) वित्तीय बाजार का एकीकरण
(c) घरेलू अर्थव्यवस्था का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण
(d) अर्थव्यवस्था के विभिन्न खण्डों का एकीकरण
Ans. (c) घरेलू अर्थव्यवस्था का वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण
[SSC 2011]
Explain: वैश्वीकरण का तात्पर्य देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दुनिया के लिए खोलना है। इसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और तकनीकी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्बाध प्रवाह होता है। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच आर्थिक निर्भरता को बढ़ाना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना है।
10. ‘वैश्वीकरण’ (Globalization) की प्रक्रिया से अभिप्राय है –
(a) वैश्विक व्यापार गुटों की स्थापना करना
(b) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाओं को समाप्त करना
(c) विश्व में एकल करेंसी लागू करना
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (b) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बाधाओं को समाप्त करना
[UPPCS 2017]
Explain: वैश्वीकरण की प्रक्रिया में विभिन्न देशों के बीच आयात-निर्यात शुल्क (Tariffs) और अन्य व्यापारिक प्रतिबंधों को कम या समाप्त किया जाता है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार सरल होता है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों को निवेश के अवसर मिलते हैं। यह वैश्विक विकास को बढ़ावा देता है।
11. भारतीय अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण का अर्थ है –
(a) बाह्य ऋण का बढ़ना
(b) भारतीय व्यापारिक इकाइयों को विदेशों में स्थापित करना
(c) दूसरे देशों के साथ आर्थिक सम्बन्धों पर लगे प्रतिबन्धों को यथासम्भव कम से कम करना
(d) आयात प्रतिस्थापन के कार्यक्रमों को त्याग देना
Ans. (c) दूसरे देशों के साथ आर्थिक सम्बन्धों पर लगे प्रतिबन्धों को यथासम्भव कम से कम करना
[UPPCS 2017]
Explain: भारतीय संदर्भ में वैश्वीकरण का अर्थ 1991 के सुधारों के बाद आर्थिक नीतियों को उदार बनाना है। इसके तहत विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई और विदेशी विनिमय नियमों को लचीला बनाया गया। इससे भारत का वैश्विक बाजार में प्रभाव और भागीदारी बढ़ी है।
12. भारत की कुल श्रमशक्ति का लगभग कितना भाग कृषि में लगा हुआ है ?
(a) 43%
(b) 49%
(c) 54%
(d) 65%
Ans. (c) 54%
Explain: भारत की आधी से अधिक कार्यशील जनसंख्या आज भी अपनी आजीविका के लिए प्राथमिक क्षेत्र यानी कृषि पर निर्भर है। हालाँकि जीडीपी में कृषि का योगदान समय के साथ कम हुआ है, लेकिन रोजगार प्रदान करने के मामले में यह अभी भी सबसे बड़ा क्षेत्र है।
13. भारत में अधिकतर बेरोजगारी है –
(a) तकनीकी
(b) चक्रीय
(c) घर्षणात्मक
(d) संरचनात्मक
Ans. (d) संरचनात्मक
Explain: संरचनात्मक बेरोजगारी तब उत्पन्न होती है जब देश की आर्थिक संरचना और उपलब्ध कौशल के बीच तालमेल नहीं होता। भारत में मांग के अनुरूप तकनीकी शिक्षा और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह बेरोजगारी सर्वाधिक देखी जाती है। यह दीर्घकालिक समस्या है।
14. भारत में बेरोजगारी के आँकड़े एकत्रित एवं प्रकाशित करता है –
(a) नीति आयोग
(b) वित्त आयोग
(c) एन. एस. एस. ओ.
(d) यू. एन. ओ.
Ans. (c) एन. एस. एस. ओ.
Explain: भारत में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO) बेरोजगारी और रोजगार से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करता है। इसके सर्वेक्षणों के आधार पर सरकार अपनी योजनाएँ और नीतियाँ तैयार करती है। वर्तमान में इसे NSO (National Statistical Office) के नाम से भी जाना जाता है।
15. भारत में बेरोजगारी की किस्म पायी जाती है –
(a) ग्रामीण अल्प रोजगार
(b) चक्रीय बेरोजगारी
(c) संरचनात्मक बेरोजगारी
(d) इनमें से सभी
Ans. (d) इनमें से सभी
Explain: भारत एक विविधतापूर्ण राष्ट्र है जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में अल्प-रोजगार, औद्योगिक क्षेत्रों में संरचनात्मक और आर्थिक मंदी के समय चक्रीय बेरोजगारी के लक्षण मिलते हैं। यहाँ शिक्षित बेरोजगारी की भी एक बड़ी समस्या है। इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग नीतियाँ आवश्यक हैं।
16. कृषि में मूलतः किस प्रकार की बेरोजगारी की प्रधानता देखने को मिलती है ?
(a) संरचनात्मक बेरोजगारी
(b) खुली बेरोजगारी
(c) अदृश्य बेरोजगारी
(d) घर्षणात्मक बेरोजगारी
Ans. (c) अदृश्य बेरोजगारी
Explain: अदृश्य या प्रच्छन्न बेरोजगारी कृषि क्षेत्र की मुख्य विशेषता है। इसमें आवश्यकता से अधिक श्रमिक एक ही काम में लगे होते हैं। यदि कुछ श्रमिकों को हटा भी दिया जाए, तो कुल उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यह भारतीय कृषि की एक बड़ी कमजोरी है।
17. कृषि में बेरोजगारी का स्वरूप देखने को मिलता है –
(a) संरचनात्मक बेरोजगारी
(b) मौसमी बेरोजगारी
(c) घर्षणात्मक बेरोजगारी
(d) इनमें से सभी
Ans. (d) इनमें से सभी
Explain: भारतीय कृषि में मौसमी बेरोजगारी सबसे आम है क्योंकि खेती साल भर काम नहीं देती। इसके अलावा तकनीक बदलने से घर्षणात्मक और पुरानी प्रणालियों के कारण संरचनात्मक बेरोजगारी भी दिखती है। सिंचाई सुविधाओं की कमी इस समस्या को और बढ़ा देती है।
18. ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी का अर्थ है –
(a) काम करने के इच्छुक होना और काम न मिलना
(b) पूरे वर्ष भर प्रत्येक दिन काम न मिलना
(c) विशाल श्रमिक शक्ति को नियोजित करने के लिए पूँजी संरचना का अपर्याप्त होना
(d) आवश्यकता से अधिक लोगों का कार्यरत होना
Ans. (d) आवश्यकता से अधिक लोगों का कार्यरत होना
[SSC 2014]
Explain: प्रच्छन्न (Disguised) बेरोजगारी का तात्पर्य उस स्थिति से है जहाँ किसी कार्य को करने के लिए जितने श्रमिकों की आवश्यकता है, उससे कहीं अधिक श्रमिक वहां कार्यरत होते हैं। इन अतिरिक्त श्रमिकों की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है। यह अक्सर संयुक्त परिवारों और कृषि में देखा जाता है।
19. भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में कौन-सी बेरोजगारी सर्वाधिक पायी जाती है ?
(a) मौसमी बेरोजगारी
(b) अदृश्य बेरोजगारी
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
Ans. (c) उपर्युक्त दोनों
Explain: ग्रामीण भारत में खेती पर निर्भरता के कारण ‘मौसमी बेरोजगारी’ (फसल के कटने के बाद काम न होना) और ‘अदृश्य बेरोजगारी’ (एक ही खेत पर पूरे परिवार का काम करना) दोनों ही व्यापक रूप से मौजूद हैं। इससे ग्रामीण आय और जीवन स्तर प्रभावित होता है।
20. वर्तमान समय में देश में किस प्रकार की बेरोजगारी की समस्या बहुत गंभीर समस्या बनी हुई है ?
(a) ग्रामीण बेरोजगारी
(b) शहरी बेरोजगारी
(c) शिक्षित बेरोजगारी
(d) खुली बेरोजगारी
Ans. (c) शिक्षित बेरोजगारी
Explain: वर्तमान में शिक्षित युवाओं के पास डिग्री होने के बावजूद उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार न मिल पाना सबसे गंभीर समस्या है। यह न केवल मानव संसाधन का नुकसान है, बल्कि सामाजिक असंतोष का भी कारण बनता है। उचित कौशल प्रशिक्षण इसका एकमात्र प्रभावी समाधान है।
21. भारत में ‘छिपी हुई बेरोजगारी’ (प्रच्छन्न बेरोजगारी) मुख्य रूप से सम्बन्धित है –
1. कृषि क्षेत्र से 2. ग्रामीण क्षेत्र से 3. विनिर्माण क्षेत्र से 4. शहरी क्षेत्र से
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट:
(a) 1 तथा 3
(b) 2 तथा 4
(c) 3 तथा 4
(d) 1 तथा 2
Ans. (d) 1 तथा 2
[UPPCS 2017]
Explain: भारत में प्रच्छन्न बेरोजगारी मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पाई जाती है। इसमें आवश्यकता से अधिक लोग एक ही कार्य में लगे होते हैं, जिसके कारण उनकी व्यक्तिगत उत्पादकता नगण्य होती है। विनिर्माण और शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर खुली या शिक्षित बेरोजगारी अधिक देखी जाती है।
22. ‘संरचनात्मक बेरोजगारी’ का कारण है –
(a) अवस्फीति की अवस्था
(b) भारी उद्योग की अभिनति
(c) अपर्याप्त उत्पादन क्षमता
(d) कच्चे माल की कमी
Ans. (c) अपर्याप्त उत्पादन क्षमता
[SSC 2000]
Explain: संरचनात्मक बेरोजगारी तब उत्पन्न होती है जब देश का औद्योगिक ढांचा और उत्पादन क्षमता उपलब्ध श्रम शक्ति को समाहित करने के लिए अपर्याप्त होती है। यह मांग और कौशल के बीच बेमेल होने का परिणाम है। भारत जैसे विकासशील देशों में यह एक दीर्घकालिक आर्थिक समस्या के रूप में विद्यमान है।
23. शहरी क्षेत्रों में आमतौर पर किस प्रकार की बेरोजगारी दिखायी देती है ?
(a) शिक्षित बेरोजगारी
(b) मौसमी बेरोजगारी
(c) प्रच्छन्न बेरोजगारी
(d) इनमें से कोई नहीं
Ans. (a) शिक्षित बेरोजगारी
[SSC 2017]
Explain: शहरी क्षेत्रों में शिक्षित बेरोजगारी सबसे प्रमुख है, जहाँ डिग्री धारक युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार नहीं मिल पाता। शहरी अर्थव्यवस्था में औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की प्रधानता होती है, जहाँ तकनीकी कौशल की कमी बेरोजगारी का मुख्य कारण बनती है। मौसमी बेरोजगारी प्रायः कृषि आधारित क्षेत्रों में पाई जाती है।
24. ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी’ का अर्थ सामान्यतः है, जहाँ ———— ।
(a) बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार रहते हैं
(b) वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध नहीं है
(c) श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य है
(d) श्रमिकों की उत्पादकता कम है
Ans. (c) श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य है
[SSC 2017]
Explain: प्रच्छन्न बेरोजगारी उस स्थिति को दर्शाती है जहाँ किसी कार्य में आवश्यकता से अधिक श्रमिक लगे होते हैं। यदि इन अतिरिक्त श्रमिकों को हटा दिया जाए, तो भी कुल उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इसी कारण उनकी सीमांत उत्पादकता को शून्य माना जाता है। यह भारतीय कृषि की एक प्रमुख विशेषता है।
25. किस प्रकार के बेरोजगारी में स्नातक तथा स्नातकोत्तर डिग्री वाले युवा नौकरियाँ प्राप्त नहीं कर पाते हैं ?
(a) मौसमी बेरोजगारी
(b) प्रच्छन्न बेरोजगारी
(c) शैक्षिक बेरोजगारी
(d) इनमें से कोई नहीं
Ans. (c) शैक्षिक बेरोजगारी
[SSC 2017]
Explain: शैक्षिक बेरोजगारी वह स्थिति है जहाँ उच्च शिक्षा प्राप्त युवा श्रम बाजार में उपयुक्त रोजगार पाने में विफल रहते हैं। यह समस्या अक्सर तब होती है जब शैक्षणिक पाठ्यक्रम उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप नहीं होते। भारत में यह समस्या युवाओं के बीच आर्थिक असंतोष का एक बड़ा कारण है।
26. बेरोजगारी तब होती है जब लोगों को वर्ष के कुछ महीनों के दौरान रोजगार नहीं मिल पाता है।
(a) शिक्षित
(b) संरचनात्मक
(c) मौसमी
(d) पूर्ण
Ans. (c) मौसमी
[SSC 2017]
Explain: मौसमी बेरोजगारी विशेष रूप से कृषि और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में देखी जाती है, जहाँ काम केवल विशिष्ट मौसमों में उपलब्ध होता है। फसल की बुवाई और कटाई के बीच का समय किसानों के लिए खाली होता है। यह अस्थायी बेरोजगारी है जो मौसम चक्र के साथ बदलती रहती है।
27. ‘प्रच्छन्न बेरोजगारी’ को और किस नाम से जाना जाता है ?
(a) अल्प रोजगार
(b) संघर्ष सम्बन्धी बेरोजगारी
(c) मौसमी बेरोजगारी
(d) चक्रीय बेरोजगारी
Ans. (a) अल्प रोजगार
[SSC 2017]
Explain: प्रच्छन्न बेरोजगारी को ‘अल्प रोजगार’ (Underemployment) के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि व्यक्ति कार्यरत तो दिखता है, लेकिन वह अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाता। उसकी कार्यक्षमता का योगदान कुल उत्पादन में नगण्य होता है। इसे अक्सर ‘अदृश्य बेरोजगारी’ भी कहा जाता है।
28. प्रच्छन्न बेरोजगारी निम्न में से किसकी एक विशेषता है ?
(a) उद्योग
(b) व्यापार
(c) कृषि
(d) यातायात
Ans. (c) कृषि
[UPPCS 2013]
Explain: प्रच्छन्न बेरोजगारी प्राथमिक क्षेत्र, विशेषकर कृषि की एक विशिष्ट विशेषता है। भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होने के कारण एक ही परिवार के सभी सदस्य छोटे भूखंडों पर काम करते हैं। यहाँ अतिरिक्त श्रम की आवश्यकता न होने पर भी लोग सामाजिक और आर्थिक विवशता के कारण कृषि में लगे रहते हैं।
29. वर्ष के अधिकांश हिस्से में बेरोजगार रहने वाले व्यक्तियों की संख्या को कहा जाता है –
(a) सामान्य स्थिति बेरोजगारी
(b) दैनिक स्थिति बेरोजगारी
(c) साप्ताहिक स्थिति बेरोजगारी
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (a) सामान्य स्थिति बेरोजगारी
[UPPCS 2019]
Explain: जब कोई व्यक्ति वर्ष के 365 दिनों में से अधिकांश समय (183 दिन या अधिक) बिना काम के रहता है, तो उसे ‘सामान्य स्थिति बेरोजगार’ कहा जाता है। NSSO द्वारा बेरोजगारी मापने के लिए इस पद्धति का उपयोग किया जाता है। यह बेरोजगारी के स्थायी स्वरूप को मापने का एक प्रमुख मानक है।
30. बाजार में कार्य उपलब्धता और उपलब्ध श्रमिक के कौशल के बीच बेमेल होने के कारण उत्पन्न होने वाली बेरोजगारी कहलाती है –
(a) मौसमी
(b) आर्थिक
(c) आंशिक
(d) संरचनात्मक
Ans. (d) संरचनात्मक
[SSC 2022]
Explain: संरचनात्मक बेरोजगारी तब होती है जब बाजार की मांग के अनुसार श्रमिकों के पास आवश्यक कौशल नहीं होता। यह अक्सर अर्थव्यवस्था में तकनीकी बदलाव या औद्योगिक ढांचे में परिवर्तन के कारण होती है। नए क्षेत्रों में रोजगार तो सृजित होते हैं, लेकिन पुराने श्रमिक उनके लिए अकुशल रह जाते हैं।
31. ———— जिसे ‘खोज बेरोजगारी’ के रूप में भी जाना जाता है, तब होता है जब कर्मचारी अपनी वर्तमान नौकरी खो देते हैं और दूसरी नौकरी खोजने की प्रक्रिया में होते हैं।
(a) प्रच्छन्न बेरोजगारी
(b) प्रतिरोधात्मक बेरोजगारी
(c) स्वैच्छिक बेरोजगारी
(d) शास्त्रीय बेरोजगारी
Ans. (b) प्रतिरोधात्मक बेरोजगारी
[SSC 2022]
Explain: प्रतिरोधात्मक या घर्षणात्मक (Frictional) बेरोजगारी एक अस्थायी स्थिति है। यह तब होती है जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से या मजबूरी में एक नौकरी छोड़कर दूसरी बेहतर नौकरी की तलाश कर रहा होता है। यह गतिशील अर्थव्यवस्था का एक सामान्य हिस्सा है और इसे कम समय के लिए माना जाता है।
32. यदि किसी देश में बेरोजगारी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे बेरोजगारी कहा जाता है।
(a) प्रौद्योगिकीय
(b) आकस्मिक
(c) दीर्घकालिक
(d) प्रतिरोधात्मक
Ans. (c) दीर्घकालिक
[SSC 2022]
Explain: दीर्घकालिक (Chronic/Long-term) बेरोजगारी वह स्थिति है जब अर्थव्यवस्था में रोजगार के अवसर लंबे समय तक उपलब्ध नहीं होते। यह अक्सर संरचनात्मक दोषों या निरंतर आर्थिक मंदी के कारण होती है। यह गरीबी और आर्थिक असमानता को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाती है, जो विकास के लिए घातक है।
33. निम्नांकित में से कौन भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण करता है ?
(a) केंद्रीय मंत्रिमण्डल
(b) लोक सभा
(c) राज्य सभा
(d) नीति आयोग
Ans. (d) नीति आयोग
[UPPCS 2018]
Explain: भारत में गरीबी रेखा का निर्धारण और उससे संबंधित डेटा का विश्लेषण नीति आयोग (पूर्व में योजना आयोग) द्वारा किया जाता है। इसके लिए समय-समय पर विशेष समितियों (जैसे तेंदुलकर और रंगराजन समिति) का गठन किया जाता है। यह कार्य राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के उपभोग व्यय डेटा पर आधारित होता है।
34. अल्पविकसित देशों में गरीबी का मुख्य कारण है –
(a) लोगों में बुद्धि का अभाव
(b) आय में असमानता
(c) सांस्कृतिक गतिविधियों का अभाव
(d) स्वैच्छिक निष्क्रियता
Ans. (b) आय में असमानता
[SSC 2010]
Explain: अल्पविकसित और विकासशील देशों में गरीबी का मूल कारण संसाधनों का असमान वितरण और आय में भारी अंतर है। यहाँ धन का संकेंद्रण कुछ ही हाथों में होता है, जिससे बहुसंख्यक आबादी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाती है। यह आर्थिक विकास के लाभों को समाज के अंतिम स्तर तक पहुँचने से रोकता है।
35. भारत में निर्धनता के स्तर का आकलन किया जाता है –
(a) विभिन्न राज्यों में प्रति व्यक्ति आय के आधार पर
(b) परिवार की औसत आय के आधार पर
(c) परिवार के उपभोग व्यय के आधार पर
(d) देश की मलिन बस्तियों की जनसंख्या के आधार पर
Ans. (c) परिवार के उपभोग व्यय के आधार पर
[UPPCS 2012]
Explain: भारत में गरीबी का मापन ‘आय’ के बजाय ‘उपभोग व्यय’ (Consumption Expenditure) के आधार पर किया जाता है। NSSO द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के माध्यम से यह देखा जाता है कि एक परिवार अपनी बुनियादी जरूरतों (भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा) पर कितना खर्च कर रहा है। इससे वास्तविक जीवन स्तर का पता चलता है।
36. मुख्यतः गरीबी उन्मूलन हेतु निम्नलिखित में से किस प्रधानमंत्री ने मूल रूप से ‘बीस सूत्री कार्यक्रम’ प्रारम्भ किया था ?
(a) जवाहरलाल नेहरू
(b) लालबहादुर शास्त्री
(c) विश्वनाथ प्रताप सिंह
(d) इन्दिरा गाँधी
Ans. (d) इन्दिरा गाँधी
[UPPCS 2017]
Explain: तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी ने 1975 में गरीबी उन्मूलन और जीवन स्तर में सुधार के लिए ‘बीस सूत्री कार्यक्रम’ (TPP) की शुरुआत की थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसे क्षेत्रों में लक्षित सुधार करना था। बाद में इसे 1982, 1986 और 2006 में पुनर्गठित किया गया।
37. किस राज्य को अत्यधिक कुपोषण के कारण ‘भारत का इथियोपिया’ कहा जाता है ?
(a) बिहार
(b) मध्य प्रदेश
(c) झारखण्ड
(d) ओडिशा
Ans. (b) मध्य प्रदेश
[UPPCS 2010]
Explain: मध्य प्रदेश में कुपोषण की दर अत्यधिक ऊँची होने के कारण, विशेषकर बच्चों में, इसकी तुलना अफ्रीकी देश इथियोपिया से की जाती है। इसी कारण इसे ‘भारत का इथियोपिया’ उपनाम दिया गया है। राज्य के श्योपुर जिले जैसे क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या सबसे गंभीर रूप में देखी गई है।
38. निम्नलिखित में से कौन-सा एक सूचकांक भारत में गरीबी की तीव्रता की माप के लिए सबसे उपयुक्त है ?
(a) मानव विकास सूचकांक
(b) लिंग असमानता सूचकांक
(c) मानव गरीबी सूचकांक
(d) बहुआयामी गरीबी सूचकांक
Ans. (d) बहुआयामी गरीबी सूचकांक
[UPPCS 2015]
Explain: बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) गरीबी को केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर जैसे 10 विभिन्न संकेतकों के आधार पर मापता है। यह गरीबी की गहराई और तीव्रता को समझने का सबसे सटीक पैमाना है। भारत में नीति आयोग भी राष्ट्रीय स्तर पर इसी सूचकांक का उपयोग करता है।